पिछले कुछ दशकों से

पिछले कुछ दशकों में न हो सका कोई समाधान,
गरीब का गरीब ही रहा बेचारा लाचार किसान।
बेचारा लाचार किसान,दिन ब दिन बेआस मरता,
जितना भी जतन कर ले,कर्ज तले यूँही दबता।
कहत "ठाकुर" कविराय,सुन लो सरकार पुकार,
अन्नदाता यदि बिछड़ गया,मच जाएगा हाहाकार।।
@लिकेश ठाकुर

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