संदेश

मेरे देश की वीरगाथा का

मेरे देश की वीरगाथा कामेरे देश की वीरगाथा का,
विश्व में विस्तार है।
विविध धर्मों की रीति का,
भारत में विस्तार है।
गिरजा मन्दिर मस्जिद का,
एक ईश्वर महान है।
जो जीवन जीना सीखाता,
महापुरुष अवतार है।
गौण चरित्र साहसी नारी का,
सर्वोच्च सम्मान है।
मेरे देश की वीरगाथा का,
विश्व में विस्तार है।लक्ष्मी,दुर्गा इतिहास की,
जीवित ललकार है।
राणा शिव की शौर्यगाथा,
शेर सी दहाड़ है।
मेरे देश की वीरगाथा का,
विश्व में विस्तार है।।
      कवि
लिकेश ठाकुर







राखी का त्यौहार

राखी का त्यौहारभाई और बहन का प्यार,
देखो आया राखी का त्यौहार।
खिलते चेहरे पर मुस्कान,
आयी घर में खुशियां बहार,
मन में उल्लास के दीप जले,
रिश्तों में विश्वास घुले मिले,
शक्कर चासनी सी मिठास।
देखो आया राखी का त्यौहार।कोई शिकवे दिल में अगर,
मिटते शिकवे भरे हो ज़हर,
कोमल रेशम की डोर बंधे,
रक्षा वचन का ध्यान धरे।
खुश है बहिन बने मधुर विचार,
देखो आया राखी का त्यौहार।।
कवि लिकेश ठाकुर

नव भारत हम बनायेंगे

नव भारत हम बनायेंगेवीरों तुम्हारी कुर्बानी का,
कर्ज हम चुकायेंगे।
भारत के नव निर्माण में,
अपना जीवन लगायेंगे।खो चुकी खुशबू मिटटी की,
बंजर भूमि उपजायेगे।
वातावरण में फैले विष को,
साफ स्वच्छ बनाएँगे।बहती हुई नदियों के तट पर,
जलधारा पुनः बहायेंगे।
सागर के जल के जैसा,
सभ्य समाज बनाएंगे।महापुरुषों के सपनों का,
नव भारत हम बनाएंगे।
विकसित संम्पदा से सृजित,
नया जोश जगाएंगे।ऊँचा हो शीश गर्व से हमारा,
विश्व में तिरंगा लहरायेंगे।
सभ्यता शिक्षा से सृजित,
नव भारत हम बनायेंगे।खेल जगत में नाम हमारा,
स्वर्ण पदक ले आयेंगे।
कोशिश होगी भाईचारा की,
हाथ हम बढ़ायेगे।छिप के जो छुरा भोंके,
घर घुसके सबक सिखायेंगे।
आन बान मर्यादा के खातिर,
दुश्मन से लड़ जायेंगे।अर्थविकास समृद्धि योग से,
गरीबी दूर भगायेंगे।
वित्त व्यवस्था हो सुचारू,
नव भारत हम बनायेंगे।कोरी ना हो कल्पना हमारी,
अंतरिक्ष में पहुंच बनायेंगे।
देश सेवा के लिये बॉर्डर पर,
दिल का टुकड़ा भिजाएँगे।शिवाजी सा शौर्य प्रताप हो,
ऐसे युवाओ को जगाएँगे।
नारी शक्तियों से सर्वसम्पन्न,
नव भारत हम बनायेंगे।आदिकला की संस्कृति का,
बच्चों में प्रसार करायेंगे।
व्यक्तित्व …

बारिश की फ़ुहारों में

बारिश की फ़ुहारों मेंबारिश की फुहारों में,
भीगने का मन करता है।
सौंधी मिट्टी के खुशबू में,
बहकने का मन करता है।
साथ हो महफ़िल की रौनक,
रूह से शर्बत टपकता है।
भींगे बदन सुर्ख़ हवा में,
दहकने का मन करता है।
बारिश की बूंदों सा इश्क़ तू,
खो जाने का मन करता है।
बारिश की फुहारों में,
भीगने का मन करता है।तुम साथ हो भीगें बरखा में,
तुममें डूबने का जरिया है।
मौसम मस्त हो हम जमीं में,
उड़ने को मन करता है।
जैसे आज़ाद पँछी गगन के,
राहे ढूढ़ने का मन करता है।
बारिश की फुहारों में,
भीगने का मन करता है।
      कवि
लिकेश ठाकुर


नशा नाश है

*नशा मुक्ति स्लोगन*नशा नाश है,जीवन बहुत खास है।
नही छुटा तो,शरीर ज़िंदा लाश है।।टूटते सपनें,कब गिर जाए अरमां है।
लत लगी तो,पूरा जीवन सर्वनाश है।।रोज नशे के घुटके से,होश में बेहोश है।
घर बर्तन बिक गये,दिखावे का जोश है।।गांजा बीड़ी तम्बाकू,मन को करो काबू।
गुटका शराब ड्रग,परिवार के बड़े डाकू।।घर की इज्ज़त जब,होये बाहर नीलामी।
पुलिस के डंडों से,सड़कों में मिले सलामी।अपराध नशा का,सच में पहला पड़ाव है।
रूक चला सही समय में,सुकून की छांव है।
                     @लिकेश ठाकुर

अगर

अगर तुम मिलो किसी मोड़ पर,
इंतेज़ार भी हम तुम्हारा कर लेंगे।
किसी रोज देर भी हो जाये तो,
इंतेज़ार भी हम तुम्हारा कर लेंगे।
अगर चाँदनी चाँद से नाराज हो तो,
मानने की कोशिश दिल से कर लेंगे।कहीं सपनों की दुनिया में खो जाओ,
जगाने की कोशिश में हम खो जायेगे।
अगर सर्द बारिश के मौसम में भिगो,
बादल की तरह तन पर बरस जायेंगे।
किसी रोज़ सावन के झूलों में झूलों,
आकर तुम्हें कुछ पल झूला जायेंगे।अगर कजरारे आँखों से आँसू बहेंगे तो,
अपने हाथों से अश्को को पोछ जायेंगे।
क़यामत की आँधीयो में तन्हाई सताये तो,
मद्धम सी सुर्ख हवाओं में बह जायेंगे।
जीना,ना मरना तुम्हारे बिना ना हो तो,
अल्फ़ाज़ दिल के कोने में लिख जायेंगे।तन्हाई के आलम में दिल की सुन पुकार,
तेरे प्यार के ख़ातिर खुदा से लड़ जायेंगे।
अगर साथ जीवन निभाने की कसमें खाये,
दिल और ज़िन्दगी को तेरे नाम कर जाएंगे
              @लिकेश ठाकुर

अजब ख़ालीपन है

अजब ख़ालीपन है,
तुझसे जुड़ा मन है।
कटती अकेली राते,
ज़िन्दगी तू अपनापन है।वक्त तो खामोश है,
तुझमें कुछ सूनापन है।
संघर्षों के तहरीज में,
जिंदगी सर्वसम्पन है।चलना तो ज़िन्दगी है,
रुकना नहीं समर्पन।
राहे तुमसे जुदा हो भी,
ना सताना ख़ालीपन।खोखले सपने सजे है,
पूरी करना ही ज़िन्दगी।
अजब ख़ालीपन है,
तुझसे जुड़ा मन है।
@लिकेश ठाकुर