प्रिय विद्यार्थियों,आदरणीय अभिभावकों एवं प्रकृति प्रेमी भाइयों एवं बहनों,आज कोरोना महामारी के दौर में एक महत्वपूर्ण बात तो सभी को पता हैं कि हमारा पर्यावरण स्वच्छ होना कितना जरूरी हैं,इस महामारी के दौरान साँसों की बोली लगते हुये आप सभी ने देखा प्राणवायु के कारण लाखों जान गई उसके हम सब जिम्मेदार हैं,हमारे वातावरण को साफ रखने में पेड़-पौधों की अहम भूमिका रही हैं परंतु हम मानव ने इस खुशनुमा वातावरण में उपस्थित वस्तुओं का सिर्फ अति भोग किया हैं और संरक्षित रखने में कही न कहीं हमनें नजरअंदाज किया हैं, जिसका खामियाज़ा आज इस तरह की भयंकर बीमारियों का वास हमारे शरीर के अंदर बाहर होता जा रहा हैं इस सब का कारण हैं हमारे पर्यावरण का अशुद्ध होना,और वातावरण को शुद्ध रखने में हमारे प्राणदायी सच्चे मित्र,पेड़ पौधे ही हैं,जो हमारे अस्तित्व की धुरी हैं,आये दिन हो रही पेड़ों की अमानक कटाई ,पौधारोपण में नीरसता के कारण आज शुद्ध प्राणवायु ऑक्सीजन की कमी हमारे वातावरण में हो रहीं हैं,इस कमी को दूर सिर्फ पेड़-पौधों को लगाकर और साफ़ सुथरा वातावरण रख कर सकते हैं, **जिस प्रकार एक नन्हा बालक ब...
*भारतीय आज़ाद हम* जमीं के सितारें हम,वतन के हमराह हम, तिरंगा की छांव में,भारतीय आज़ाद हम, कोमल सा मन लिये,क्रांति का आगाज़ हम, गुलामी की जंजीरे तोड़,करें वतन का उत्थान हम। अंतरिक्ष या पाताल के,राज खोलती आवाज हम, कदम बढ़ाए सभी चलते,भारत का सम्मान हम। वसुधैव कुटुंबकम मंत्र का,हरपल करते आगाज हम। भारत माँ शीश झुकने नही देंगे,वादा करते आज हम। कवि/शिक्षक *लिकेश ठाकुर* likeshthakur@gmail.com रचना स्वलिखित एवं मौलिक
*माँ मैं बड़ा क्यों हो गया* माँ मैं बड़ा क्यों हो गया, शिशु बन जाऊं एक बार। बीता समय शिशु से यौवन, आज नही पल-पल का साथ। बड़ा हो गया हूँ फिर भी, मन रहता हरवक्त साथ। आँचल में सोने का मन कर...
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