गीता और हदीस

गहरी सोच में पड़े हुए हैं,
आज अमीर और गरीब।
सम अस्तित्व का किरदार हैं,
कहते गीता और हदीस।
भेदभाव अब मिटा रहा हैं,
समान भाव और रक्त बीज।।
✍️कवि लिकेश ठाकुर

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