मजहब

मजहब और गरीबी नहीं देखती ये महामारी,
कोई आता इसके चपेट में,भुगतती दुनिया सारी।
थोड़ा जतन उनका भी कर दो,भूख जिसे हैं मारी।
मजहब और गरीबी नहीं देखती ये महामारी।।

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