अबके बसंत

अबके बसंत यूँ बीत गया,
प्यार का मौसम रीत गया।
हम बेपरवाह बैठे रहे घरों में,
फूलों को भौंरा जीत गया।
निहारते रहे खिलते फूलों को,
कलियों से हमें प्रीत हो गया।
नयन भी हमारे बड़े धोखेबाज़,
मौसम से हमें मीत हो गया।।

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