चंचल चाँदनी सी

चंचल चाँदनी सी,
तुम घर से निकलती हो।
मदमस्त हवाओं सी,
तुम पँछी सी चहकती हो।
रूह की परछाई सी,
तुम शमा महफ़िल हो।
अनजाने ख्वाबों सी,
तुम मुझमें ढ़लती हो।।
@लिकेश ठाकुर

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