तेरे नयनों पर किया भरोसा

तेरे नयनों पर किया भरोसा,
दोनों ही झूठे निकले।
लबों की हो गयी धोखेबाज़ी,
सपनें भी कोरे निकले।
फ़िदा हुये तेरे हँसने पर,
चेहरे के भाव नकलीनिकले।
अश्कों से बहती हुयी धारा,
ग़म हवाओं से गैर निकले।।
तेरे नयनों पर किया भरोसा,
दोनों ही झूठे निकले।
कवि लिकेश ठाकुर

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