अजब ख़ालीपन है

अजब ख़ालीपन है,
तुझसे जुड़ा मन है।
कटती अकेली राते,
ज़िन्दगी तू अपनापन है।

वक्त तो खामोश है,
तुझमें कुछ सूनापन है।
संघर्षों के तहरीज में,
जिंदगी सर्वसम्पन है।

चलना तो ज़िन्दगी है,
रुकना नहीं समर्पन।
राहे तुमसे जुदा हो भी,
ना सताना ख़ालीपन।

खोखले सपने सजे है,
पूरी करना ही ज़िन्दगी।
अजब ख़ालीपन है,
तुझसे जुड़ा मन है।
@लिकेश ठाकुर



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